गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, अपितु वह प्रकाश हैं जो साधक के भीतर स्थित सत्य को जागृत करते हैं।
परमपूज्य दिव्यानन्द भारती जी का अवतरण 5 मई 1992, अक्षय तृतीया के पावन दिवस पर हुआ। मध्यप्रदेश के एक सुसंस्कृत परिवार में जन्म लेकर आपने बाल्यकाल से ही आध्यात्मिकता की ओर स्वाभाविक प्रवृत्ति प्रदर्शित की।